NIT श्रीनगर: छात्राएं बोलीं मिलती हैं रेप की धमकियां, स्मृति ईरानी का दौरा रद
केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी और जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री निर्मल सिंह एनआइटी श्रीनगर में पैदा हुए हालात का जायजा लेने आज श्रीनगर नहीं जाएंगे। इस बात की जानकारी देते हुए निर्मल सिंह ने बताया हमने एक जांच टीम गठित की है जो 15 दिनों में अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। ये जांच टीम श्रीनगर के एडिशनल मजिस्ट्रेट की देखरेख में कार्य करेगी और अपनी 15 दिनों में रिपोर्ट देगी।
लाठीचार्ज वाली बात पर सफाई देते हुए निर्मल सिंह ने बताया कि घटना के बाद उन्हेें जो जानकारी मिली उसके आधार पर उन्होंने कहा था कि हल्की लाठीचार्ज की गई है। बता दें कि इस घटना में कई छात्र घायल हुए थे।
हालांकि पहले वह 13 अप्रैल को आने वाली थी, लेकिन एनआइटी में एमएचआरडी के प्रतिनिधिमंडल के साथ बातचीत में बाहरी राज्यों के छात्रों द्वारा कड़ा रुख अपनाने और एनआइटी को किसी अन्य जगह स्थानांतरित करने की मांग को देखते हुए स्मृति ने खुद छात्रों से बात करने का फैसला किया है। इसके साथ ही उन्होंने एमएचआरडी के प्रतिनिधियों को 11 अप्रैल से शुरू हो रही एनआइटी की परीक्षाओं के संपन्न होने तक कश्मीर में ही रुकने का निर्देश दिया है।
NIT श्रीनगर कैंपस शिफ्ट करने की मांग
आज श्रीनगर कैंपस के बाहर सैकडो़ं छात्रों ने प्रदर्शन किया। ये छात्र कैंपस को श्रीनगर से कहीं और शिफ्ट करने की मांग कर रहे थे। सभी छात्र अपने हाथों में बैनर, होर्डिंग के अलावा तिरंगा लेकर प्रदर्शन कर रहे थे।
छात्राएं बोली रेप और करियर तबाह करने की मिलती हैं धमकियां
इससे पहले एनआइटी में पढ़ने वाली गैर कश्मीरी छात्राओं ने भी एमएचआरडी प्रतिनिधियों के समक्ष अपना पक्ष जोरदार ढंग से रखा। तीन छात्राएं बोली, यहां हमें हमारा करियर तबाह करने की धमकी मिल रही हैं। हमें सोशल साइटों पर धमकाया जा रहा है। जब हम बाहर जाते हैं तो कहते हैं कि एक का रेप कर दो, बाकी सब चुप हो जाएंगी। एनआइटी में अपने सहपाठियों पर पुलिस की बर्बरता के खिलाफ बुधवार को छात्राओं ने परिसर में मौन जुलूस निकाला। छात्राओं ने मुख्य प्रशासकीय ब्लॉक से कुछ दूरी पर पार्क में बारिश के बावजूद एक घंटा धरना भी दिया। छात्राएं परिसर में सक्रिय राष्ट्रविरोधी तत्वों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए गैर कश्मीरी छात्रों की सुरक्षा की मांग कर रही थीं। वहीं गैर कश्मीरी छात्रों ने बुधवार को भी अपनी कक्षाओं का बहिष्कार किया। वह दोपहर बारह बजे तक परिसर में हॉस्टल के पास बाहर खुले में बारिश में भी अपनी मांगों के समर्थन में प्रदर्शन करते रहे। इस दौरान छात्र-छात्राओं ने परिसर में कई जगह तिरंगा भी फहराया।
गैर कश्मीरी छात्रों का दर्द
"हम पर अश्लील फब्तियां कसी जाती हैं। कहते हैं, एक का रेप हो जाएगा तो बाकी सभी चुप हो जाएंगी। यहां त्योहार मनाने की इजाजत लेनी पड़ती है। अपने देश में तिरंगा लहराने की अनुमति नहीं है, अगर विरोध करो तो फेल करने की धमकी दी जाती है। चार साल की डिग्री छह साल में पूरी करने को धमकाया जाता है। कई बार तो जान से मारने की धमकियां तक मिलीं। बस, बहुत हो गया, अब और सहन नहीं होता।" बुधवार को राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआइटी) श्रीनगर में हालात का जायजा लेने पहुंचे मानव संसाधन विकास मंत्रालय (एमएचआरडी) के प्रतिनिधियों के सामने बाहरी राज्यों के छात्र-छात्राओं का दर्द और गुस्सा उबल पड़ा।
लाठीचार्ज वाली बात पर सफाई देते हुए निर्मल सिंह ने बताया कि घटना के बाद उन्हेें जो जानकारी मिली उसके आधार पर उन्होंने कहा था कि हल्की लाठीचार्ज की गई है। बता दें कि इस घटना में कई छात्र घायल हुए थे।
हालांकि पहले वह 13 अप्रैल को आने वाली थी, लेकिन एनआइटी में एमएचआरडी के प्रतिनिधिमंडल के साथ बातचीत में बाहरी राज्यों के छात्रों द्वारा कड़ा रुख अपनाने और एनआइटी को किसी अन्य जगह स्थानांतरित करने की मांग को देखते हुए स्मृति ने खुद छात्रों से बात करने का फैसला किया है। इसके साथ ही उन्होंने एमएचआरडी के प्रतिनिधियों को 11 अप्रैल से शुरू हो रही एनआइटी की परीक्षाओं के संपन्न होने तक कश्मीर में ही रुकने का निर्देश दिया है।
NIT श्रीनगर कैंपस शिफ्ट करने की मांग
आज श्रीनगर कैंपस के बाहर सैकडो़ं छात्रों ने प्रदर्शन किया। ये छात्र कैंपस को श्रीनगर से कहीं और शिफ्ट करने की मांग कर रहे थे। सभी छात्र अपने हाथों में बैनर, होर्डिंग के अलावा तिरंगा लेकर प्रदर्शन कर रहे थे।
छात्राएं बोली रेप और करियर तबाह करने की मिलती हैं धमकियां
इससे पहले एनआइटी में पढ़ने वाली गैर कश्मीरी छात्राओं ने भी एमएचआरडी प्रतिनिधियों के समक्ष अपना पक्ष जोरदार ढंग से रखा। तीन छात्राएं बोली, यहां हमें हमारा करियर तबाह करने की धमकी मिल रही हैं। हमें सोशल साइटों पर धमकाया जा रहा है। जब हम बाहर जाते हैं तो कहते हैं कि एक का रेप कर दो, बाकी सब चुप हो जाएंगी। एनआइटी में अपने सहपाठियों पर पुलिस की बर्बरता के खिलाफ बुधवार को छात्राओं ने परिसर में मौन जुलूस निकाला। छात्राओं ने मुख्य प्रशासकीय ब्लॉक से कुछ दूरी पर पार्क में बारिश के बावजूद एक घंटा धरना भी दिया। छात्राएं परिसर में सक्रिय राष्ट्रविरोधी तत्वों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए गैर कश्मीरी छात्रों की सुरक्षा की मांग कर रही थीं। वहीं गैर कश्मीरी छात्रों ने बुधवार को भी अपनी कक्षाओं का बहिष्कार किया। वह दोपहर बारह बजे तक परिसर में हॉस्टल के पास बाहर खुले में बारिश में भी अपनी मांगों के समर्थन में प्रदर्शन करते रहे। इस दौरान छात्र-छात्राओं ने परिसर में कई जगह तिरंगा भी फहराया।
गैर कश्मीरी छात्रों का दर्द
"हम पर अश्लील फब्तियां कसी जाती हैं। कहते हैं, एक का रेप हो जाएगा तो बाकी सभी चुप हो जाएंगी। यहां त्योहार मनाने की इजाजत लेनी पड़ती है। अपने देश में तिरंगा लहराने की अनुमति नहीं है, अगर विरोध करो तो फेल करने की धमकी दी जाती है। चार साल की डिग्री छह साल में पूरी करने को धमकाया जाता है। कई बार तो जान से मारने की धमकियां तक मिलीं। बस, बहुत हो गया, अब और सहन नहीं होता।" बुधवार को राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआइटी) श्रीनगर में हालात का जायजा लेने पहुंचे मानव संसाधन विकास मंत्रालय (एमएचआरडी) के प्रतिनिधियों के सामने बाहरी राज्यों के छात्र-छात्राओं का दर्द और गुस्सा उबल पड़ा।
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