तीन बार तलाक पर SC में चुनौती देने वाली शायरा को न्याय की आस
तीन बार तलाक कह कर तलाक लेने की प्रथा के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने वाली
शायरा बानो का कहना है कि उन्हें उम्मीद है कि एक दिन न्याय जरुर मिलेगा।
शायरा का कहना है "उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से तीन बार तलाक को असंवैधानिक
करार देने की मांग की जिससे आने वाली मुस्लिम पीढ़ी का नुकसान होने से बच
सके और सुप्रीम ने इस मामले में जवाब देने के लिए आल इंडिया मुस्लिम लॉ
बोर्ड को 6 हफ्ते का समय दिया है।"
शायरा ने बताया, "मेरे पति द्वारा मुझे तीन बार तलाक कहकर अक्टूबर 2015 में तलाक दिया गया और मुझे शारीरीक और मानसिक रूप से प्रताड़ित करने के साथ-साथ अबॉर्शन कराने को भी मजबूर किया गया।"
आपको बता दें कि शायरा ने सुप्रीम कोर्ट में मौखिक तलाक या तीन बार तलाक कहने को असंवैधानिक घोषित करने की अर्जी दी थी जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया था।
इससे पहले भी, इसी तरह के मामले में 1985 में इंदौर की शाह बानो ने उच्चतम न्यायालय में केस किया था। जिसमें उन्होंने तलाक के बाद अपने पति से गुजारे भत्ते की मांग की थी, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने स्वीकार कर लिया था लेकिन सुप्रीम कोर्ट में केस जीतने के बाद भी शाहबानो को पति से हर्जाना नहीं मिल सका। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने शाहबानो केस में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का पुरज़ोर विरोध किया। इस विरोध के फलस्वरूप 1986 में राजीव गांधी की सरकार ने मुस्लिम महिला (तलाक पर अधिकार संरक्षण) अधिनियम, 1986 पारित किया। जिसके तहत मुस्लिम महिलाओं से गुजारे भत्ते का हक छीन लिया गया। Watch videos http://videos.jagran.com/
शायरा ने बताया, "मेरे पति द्वारा मुझे तीन बार तलाक कहकर अक्टूबर 2015 में तलाक दिया गया और मुझे शारीरीक और मानसिक रूप से प्रताड़ित करने के साथ-साथ अबॉर्शन कराने को भी मजबूर किया गया।"
आपको बता दें कि शायरा ने सुप्रीम कोर्ट में मौखिक तलाक या तीन बार तलाक कहने को असंवैधानिक घोषित करने की अर्जी दी थी जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया था।
इससे पहले भी, इसी तरह के मामले में 1985 में इंदौर की शाह बानो ने उच्चतम न्यायालय में केस किया था। जिसमें उन्होंने तलाक के बाद अपने पति से गुजारे भत्ते की मांग की थी, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने स्वीकार कर लिया था लेकिन सुप्रीम कोर्ट में केस जीतने के बाद भी शाहबानो को पति से हर्जाना नहीं मिल सका। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने शाहबानो केस में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का पुरज़ोर विरोध किया। इस विरोध के फलस्वरूप 1986 में राजीव गांधी की सरकार ने मुस्लिम महिला (तलाक पर अधिकार संरक्षण) अधिनियम, 1986 पारित किया। जिसके तहत मुस्लिम महिलाओं से गुजारे भत्ते का हक छीन लिया गया। Watch videos http://videos.jagran.com/
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