उत्तराखंडः राष्ट्रपति शासन पर हाईकोर्ट में बहस स्थगित, अब कल होगी सुनवाई

उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन लागू करने और केंद्र के लेखानुदान अध्यादेश को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर नैनीताल हाई कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति केएम जोजफ व न्यायमूर्ति वीके बिष्ट की खंडपीठ में आज लंबी सुनवाई के बाद बहस को कल तक के लिए स्थगित कर दिया गया। अब सुनवाई कल भी जारी रहेगी। वहीं, विनियोग विधेयक पर केंद्र के अधिवक्ता की ओर से अतिरिक्त समय मांगने को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया।

केंद्र की ओर से पैरवी करते हुए असिस्टेंट सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि विनियोग विधेयक को चर्चा के बजाय ध्वनि मत से पारित कर दिया। सरकार ने मत विभाजन की मांग नहीं मानी। इसलिए केंद्र को लेखानुदान अध्यादेश लाना पड़ा। उन्होंने हरीश रावत के संशोधन प्रार्थना पत्र पर भी सवाल उठाए। इसके जवाब के लिए उन्होंने कोर्ट से समय मांगा। इसे कोर्ट ने खारिज कर दिया। केंद्र के अधिवक्ता ने तर्क दिया कि विनियोग विधेयक राष्ट्रपति शासन लागू होने के बाद राज्यपाल के पास पहुंचा।

इस पर निवर्तमान सीएम हरीश रावत की ओर से पूर्व केंद्रीय मंत्री व अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने दलील दी कि गवर्नर तय नहीं कर सकते कि विधेयक कैसे पारित हो। उन्होंने कहा कि भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने रामनवमी तक या 15 अप्रैल तक सरकार बनाने का बयान दिया, जबकि इस समय राष्ट्रपति शासन लागू है।

उन्होंने इस मामले को लंबित करने के लिए केंद्र से समय मांगने का विरोध किया। उन्होंने कहा कि गत दिवस साढ़े दस बजे प्रार्थना पत्र दाखिल कर दिया गया था। बावजूद इसके जवाब नहीं दिया। यह पहली बार हुआ कि विनियोग विधेयक को आधार बनाकर सरकार को अपदस्थ किया गया, जबकि विनियोग विधेयक पारित होने से पहले हरक सिंह रावत ने अपने विभाग का बजट भी पारित करा दिया था।

उन्होंने तर्क दिया कि कांग्रेस के बागी विधायक भाजपा विधायकों के साथ बस में गए। इस पर स्पीकर ने नौ बागियों को सात दिन का नोटिस दिया। 19 मार्च को राज्यपाल ने पत्र भेजकर 28 मार्च तक बहुमत साबित करने को कहा।

उन्होंने पूरे घटनाक्रम की जानकारी देते हुए कहा कि धारा 356 आपातकालीन शक्ति है। उन्होंने कहा कि ये तू-तू-मैं-मैं का मामला नहीं है। संवैधानिक संकट का मामला है। उन्होंने कर्नाटक के एसआर बोमाई का उदाहरण देते हुए कहा कि फ्लोर टेस्ट ही बहुमत का मंच है।

उन्होंने कहा कि सरकारिया आयोग की सिफारिश हैं कि आपात स्थिति और संवैधानिक संकट के बहाने सत्ता हासिल करने को 356 का उपयोग गलत है। उन्होंने कहा कि निर्वाचित विधानसभा को 356 लगाकर निलंबित करना असंवैधानिक है। ये कानूनी नहीं राजनीतिक फैसला है। इस संबंध में उन्होंने बोमाई केस में नौ जजों की संवैधानिक पीठ का भी हवाला दिया।

अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि संवैधानिक पीठ ने राज्यपाल की रिपोर्ट को पर्याप्त आधार नहीं माना। फ्लोर टेस्ट ही लोकतंत्र की मजबूती के लिए जरूरी है। उत्तराखंड के मामले में राज्यपाल ने पहले फ्लोर टेस्ट को कहा। फिर राष्ट्रपति शासन की सिफारिश भेजी, जो गलत है। उन्होंने दलील दी कि राज्यपाल सदन की कार्रवाई का हिस्सा नहीं है। सदन कैसे चले, यह तय करना राज्यपाल का काम नहीं है।

उन्होंने कहा कि 17 मार्च को पांच विभागों का बजट पारित हुआ। संविधान के अनुच्छेद 212 में इसका साफ उल्लेख है कि स्पीकर को सदन चलाने की आजादी है। विनियोग विधेयक पारित होने के बाद ही मत विभाजन की मांग की गई थी। उन्होंने कहा कि बागी और विपक्ष के विधायकों की विनियोग विधेयक पर मत विभाजन की मांग नहीं मानना संवैधानिक संकट नहीं है।

उन्होंने कहा कि विभागों का बजट बिना कटौती प्रस्ताव के पारित कर दिया। इसमें वे मंत्री भी शामिल रहे, जो बागी हैं, तो इसके बाद मत विभाजन की मांग का औचित्य ही नहीं रह जाता है। ऐसे में राज्यपाल या केंद्र सरकार स्पीकर के फैसले पर सवाल नहीं उठा सकते हैं। केंद्र यह तय नहीं कर सकता है कि सदन प्रस्ताव को ध्वनि मत से पारित करे या मत विभाजन के आधार पर। उन्होंने कहा कि स्पीकर ने बिल पास होते ही राज्यपाल को दूरभाष पर सूचना दे दी थी।

केंद्र की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल मनिंदर सिंह, असिस्टेंट सॉलिसिटर जनरल राकेश थपलियाल, नलिन कोहली तो निवर्तमान सीएम की ओर से कपिल सिब्बल भी इस मौके पर मौजूद रहे।
गौरतलब है कि न्यायमूर्ति यूसी ध्यानी की एकल पीठ ने हरीश रावत की याचिका पर 31 मार्च को विधान सभा में शक्ति परीक्षण के आदेश देते हुए बागी नौ विधायकों को भी मताधिकार का अधिकार दे दिया था।
एकल पीठ के इस आदेश को केंद्र सरकार ने इस आधार पर चुनौती दी कि राष्ट्रपति शासन लागू होने के बाद फ्लोर टेस्ट नहीं हो सकता। वहीं, इसी आदेश को निवर्तमान संसदीय कार्य मंत्री इंदिरा हृदयेश ने इस आधार पर चुनौती दी कि जब विधानसभा अध्यक्ष बागियों की सदस्यता खत्म कर चुके हैं, तो वे फ्लोर टेस्ट में कैसे शामिल हो सकते हैं।
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