जंग-ए-आजादी की नायिका के जनाजे में उमड़ी महिलाएं, महिलाओं ने ही दिया कंधा

इलाके में उनकी अलग पहचान थी। लोगों, खासकर महिलाओं में उनका विशेष सम्मान था। जंग-ए-आजादी की इस नायिका शनिचरी देवी के निधन के बाद कंधा देने के लिए पूरे इलाके की महिलाएं उमड़ पड़ीं। उनके जनाजे को महिलाएं ही शमशान ले गईं।

आजादी की जंग में पति के साथ शामिल रहीं शनिचरी देवी का बुधवार की शाम उनके गांव राजपुर के इस्माइलपुर में निधन हो गया। वे सौ वर्ष की थीं। स्वतंत्रता सेनानी के रूप में क्षेत्र में उनका काफी सम्मान था। गांव की महिलाओं ने उन्हें कंधा देकर नारी शक्ति का मान बढ़ाया।

बाद में राजपुर थाना पुलिस ने स्वतंत्रता सेनानी के सम्मान में गार्ड आफ ऑनर पेश किया। इसके उपरांत गुरुवार को चरित्रवन श्मशान घाट पर उनके पार्थिव शरीर का अंतिम संस्कार किया गया।

भारत छोड़ो आंदोलन में काटी जेल की सजा

राजपुर प्रखंड के इस्माइलपुर गांव की शनिचरी देवी ने 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में महिला दस्ता का नेतृत्व किया था। इस दौरान वे अपने पति देवराज ङ्क्षसह के साथ मिलकर कई आंदोलनों में शामिल रहीं। 1946 में वे पति के साथ अंग्रेज पुलिस के हत्थे चढ़ गईं और काफी समय तक वाराणसी जेल में बंद रहीं।

आजादी के बाद पति भारतीय सेना में शामिल हो गए और शनिचरी देवी सामाजिक कार्यों में जुट गईं। हालांकि, कुछ ही दिनों बाद पति देवराज ङ्क्षसह का निधन हो गया। शनिचरी देवी को जिला प्रशासन भी कई बार स्वतंत्रता सेनानी के रूप में सम्मानित कर चुका है।

महिलाओं ने की पहल

गुरुवार को स्वतंत्रता सेनानी की अंतिम यात्रा में अचानक महिलाओं ने पार्थिव शरीर को कंधा देने की पहल की। रस्म के तौर पर ऐसा विरले मामलों में ही होता है। महिलाओं की इच्छा को देखते हुए उन्हें पार्थिव शरीर को कंधा देने की इजाजत दी गई। Watch News Videos http://videos.jagran.com/
No comments :

No comments :

Post a Comment